पर्यावरण और संत रामपाल जी महाराज
पूंजीवादने की पर्यावरण की अपरिमित हानि !
पूंजीवादद्वारा हुई पर्यावरण की अपरिमित हानि कभीभी भरनेवाली नहीं है । पोन यू नामक चीनी तज्ञ का कहना है कि, ‘यूरोपने पिछली शताब्दी में विकास के नामपर पर्यावरण का जितना विनाश किया, उतना विनाश हमने तीन दशकों में किया है ।’
विज्ञानके कारण हुए प्रदूषणसे विश्व पर्यावरण धोखेमें !
‘नोबेल पारितोषिक’ विजेता ‘अर्नेस्य’ने ३१.१.२००३ को नई दिल्लीमें हुए ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थामें’ ‘शोध एवं शिक्षासे परे हमारे सामाजिक कर्तव्य’के विषयपर बोलते हुए कहा, ‘मुक्त अर्थव्यवस्थामें आज केवल मूल्य नहीं अपितु केवल लाभ ही महत्त्वपूर्ण होनेसे नैतिक प्रदूषण निर्माण हुआ है । नैतिक प्रदूषण इतना अधिक हो गया है कि, इस अधःपतनके कारण समाजकी प्रकृतिके विषयमें गैरजिम्मेदारी बढ गई है, उसी कारण जागतिक पर्यावरण संकटमें आ गया है ।’
प्रकृतिपर मानव अत्याचार करेगा, तो प्रकृति भी उसका बदला लेगी !
‘प्रकृतिपर मानव अत्याचार करेगा, तो प्रकृति भी उसका बदला लेगी । उर्जा का अभाव, अनावृष्टि, अकाल, वांशिक संघर्ष, नैतिक अधःपतन, भीषण रोगों का प्रादुर्भाव तथा अंत में महायुद्ध ! वर्षा कैसे होगी ? मेघ अंतरिक्ष में जमा होकर बरसतें हैं वह केवल वृक्षों के लिए । डॉलर्सपर प्रेम करनेवाले निकृष्ट मनुष्य के लिए कैसे और क्यों मेघ बरसेंगे ?.. कर्मविपाक या कर्मनियम व्यष्टि, समष्टि तथा अखिल विश्व नियंत्रित करता है, यह नियम सर्वत्र अव्याहत एवं, निराबाध है !’
मनुष्य के अति स्वार्थ के कारण
भगवानने सुरक्षा दी हुई पृथ्वी को भी धोखा पहुंचना !
मनुष्य के बढते पापों के कारण ही प्रदूषण की समस्या बढ रही है !
यह सब आज आधुनिकता के प्रभाव से हो रहा है । आज प्रत्येक मनुष्य में विषय वासनाओं के अत्याधिक प्रभाव के कारण तथा सत्य के ज्ञान का अभाव होने से मानव जीवन में अनावश्यक विकृतियां जन्म ले रही हैं, उन्हें ही पाप कहते है। आज यह पाप इतना बढ गया है, कि इस विकृति के कारण स्वयं मानवने अपना शरीर दूषित कर लिया है । बाहर के वातावरण में मनुष्य के विचारों के कारण निर्माण हुए परिपाक से सर्वत्र की हवा तथा पानी दूषित हो गया है; इसीलिए आज प्रमुखता से प्रदूषण की समस्या सभी को डरा रही है । यह सब हमारी विकृति के कारणही हुआ है । मनुष्य को जीने के लिए शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, सात्त्विक आहार, स्थलकाल तथा वातावरण के अनुसार वेशभूषा और घर की आवश्यकता है;
एक संत है जो अपनी भक्ति शक्ति से पर्यावरण में होने वाले बदलाव को भी बदल सकता है और वह सब सिर्फ और सिर्फ इस पृथ्वी पर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की सही भक्ति साधना से ही संभव है अधिक जानकारी के लिए जरूर देखें साधना चैनल शाम 7:30 बजे यहां लॉग इन करें www.jagatgururampalji.org
https://www.youtube.com/watch?v=N1AXT2In9NY
पूंजीवादद्वारा हुई पर्यावरण की अपरिमित हानि कभीभी भरनेवाली नहीं है । पोन यू नामक चीनी तज्ञ का कहना है कि, ‘यूरोपने पिछली शताब्दी में विकास के नामपर पर्यावरण का जितना विनाश किया, उतना विनाश हमने तीन दशकों में किया है ।’
विज्ञानके कारण हुए प्रदूषणसे विश्व पर्यावरण धोखेमें !
‘नोबेल पारितोषिक’ विजेता ‘अर्नेस्य’ने ३१.१.२००३ को नई दिल्लीमें हुए ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थामें’ ‘शोध एवं शिक्षासे परे हमारे सामाजिक कर्तव्य’के विषयपर बोलते हुए कहा, ‘मुक्त अर्थव्यवस्थामें आज केवल मूल्य नहीं अपितु केवल लाभ ही महत्त्वपूर्ण होनेसे नैतिक प्रदूषण निर्माण हुआ है । नैतिक प्रदूषण इतना अधिक हो गया है कि, इस अधःपतनके कारण समाजकी प्रकृतिके विषयमें गैरजिम्मेदारी बढ गई है, उसी कारण जागतिक पर्यावरण संकटमें आ गया है ।’
प्रकृतिपर मानव अत्याचार करेगा, तो प्रकृति भी उसका बदला लेगी !
‘प्रकृतिपर मानव अत्याचार करेगा, तो प्रकृति भी उसका बदला लेगी । उर्जा का अभाव, अनावृष्टि, अकाल, वांशिक संघर्ष, नैतिक अधःपतन, भीषण रोगों का प्रादुर्भाव तथा अंत में महायुद्ध ! वर्षा कैसे होगी ? मेघ अंतरिक्ष में जमा होकर बरसतें हैं वह केवल वृक्षों के लिए । डॉलर्सपर प्रेम करनेवाले निकृष्ट मनुष्य के लिए कैसे और क्यों मेघ बरसेंगे ?.. कर्मविपाक या कर्मनियम व्यष्टि, समष्टि तथा अखिल विश्व नियंत्रित करता है, यह नियम सर्वत्र अव्याहत एवं, निराबाध है !’
मनुष्य के अति स्वार्थ के कारण
भगवानने सुरक्षा दी हुई पृथ्वी को भी धोखा पहुंचना !
मनुष्य के बढते पापों के कारण ही प्रदूषण की समस्या बढ रही है !
यह सब आज आधुनिकता के प्रभाव से हो रहा है । आज प्रत्येक मनुष्य में विषय वासनाओं के अत्याधिक प्रभाव के कारण तथा सत्य के ज्ञान का अभाव होने से मानव जीवन में अनावश्यक विकृतियां जन्म ले रही हैं, उन्हें ही पाप कहते है। आज यह पाप इतना बढ गया है, कि इस विकृति के कारण स्वयं मानवने अपना शरीर दूषित कर लिया है । बाहर के वातावरण में मनुष्य के विचारों के कारण निर्माण हुए परिपाक से सर्वत्र की हवा तथा पानी दूषित हो गया है; इसीलिए आज प्रमुखता से प्रदूषण की समस्या सभी को डरा रही है । यह सब हमारी विकृति के कारणही हुआ है । मनुष्य को जीने के लिए शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, सात्त्विक आहार, स्थलकाल तथा वातावरण के अनुसार वेशभूषा और घर की आवश्यकता है;
एक संत है जो अपनी भक्ति शक्ति से पर्यावरण में होने वाले बदलाव को भी बदल सकता है और वह सब सिर्फ और सिर्फ इस पृथ्वी पर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की सही भक्ति साधना से ही संभव है अधिक जानकारी के लिए जरूर देखें साधना चैनल शाम 7:30 बजे यहां लॉग इन करें www.jagatgururampalji.org




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